श्रीमहंत रविन्द्र पुरी जी महाराज
श्रीमहंत रविन्द्र पुरी जी महाराज श्री पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी के अध्यक्ष एवं अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के प्रमुख संतों में से एक हैं। वे सनातन धर्म, संत परंपरा, गुरु-शिष्य परंपरा तथा भारतीय आध्यात्मिक संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए समर्पित हैं। उनके नेतृत्व में अखाड़ा धार्मिक, आध्यात्मिक एवं सामाजिक गतिविधियों का संचालन करते हुए धर्म जागरण और लोककल्याण के कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रहा है.
वर्ष 1994 में उन्हें श्री पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी का सचिव नियुक्त किया गया। बाद में वे मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट, हरिद्वार के अध्यक्ष बने तथा वर्ष 2021 में उन्हें अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद का अध्यक्ष चुना गया। उनके मार्गदर्शन में संत समाज के संगठन, सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार तथा धार्मिक परंपराओं के संरक्षण को नई दिशा मिली है.
श्रीमहंत रविन्द्र पुरी जी महाराज का जीवन त्याग, सेवा, अनुशासन एवं आध्यात्मिक नेतृत्व का प्रेरणास्रोत है। वे संत समाज के मध्य समन्वय स्थापित करने, धार्मिक आयोजनों का मार्गदर्शन करने तथा युवा पीढ़ी को सनातन संस्कृति से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं. .
भूमिकाएँ एवं उत्तरदायित्व
शिक्षा एवं प्रारंभिक जीवन
जन्म : 20 अप्रैल 1970
जन्मस्थान : उत्तर प्रदेश
शिक्षा : आचार्य, सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी
भाषाएँ : हिन्दी, संस्कृत एवं अंग्रेज़ी
वैवाहिक स्थिति : अविवाहित
आध्यात्मिक यात्रा
श्रीमहंत
रविन्द्र पुरी जी महाराज ने युवा अवस्था से ही धर्म एवं संत परंपरा के प्रति स्वयं को
समर्पित किया। श्री पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी से जुड़ने के पश्चात उन्होंने
संगठनात्मक दायित्वों का निर्वहन किया और वर्ष 1994 में अखाड़े के सचिव नियुक्त हुए।
आगे चलकर वे अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष बने और संत समाज के प्रमुख
प्रतिनिधियों में स्थापित हुए।
धर्म एवं समाज सेवा
उनके
नेतृत्व में सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार, धार्मिक आयोजनों के सफल संचालन, संत समाज के
समन्वय तथा समाज सेवा के अनेक कार्य संपन्न हुए। कोविड-19 के दौरान उन्होंने राहत
कार्य, भोजन वितरण, आर्थिक सहायता तथा स्वास्थ्य सेवाओं में उल्लेखनीय योगदान दिया।
प्रमुख उत्तरदायित्व
* सनातन धर्म का संरक्षण एवं संवर्धन
* संत समाज का मार्गदर्शन एवं समन्वय
* श्री पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी का प्रशासनिक नेतृत्व
* अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद का नेतृत्व
* कुंभ एवं महाकुंभ की धार्मिक परंपराओं का संचालन
* गुरु-शिष्य परंपरा का संरक्षण
* धार्मिक एवं सामाजिक सेवा परियोजनाओं का मार्गदर्शन
* युवा पीढ़ी को भारतीय संस्कृति एवं आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ना
