॥ श्री गुरु निरंजन देव ॥
अखण्डमण्डलाकारं व्याप्तं येन चराचरम् ।
तत्पदं दर्शितं येन तस्मै श्रीगुरवे नमः ॥
अज्ञानतिमिरान्धस्य ज्ञानाञ्जनशलाकया ।
चक्षुरुन्मीलितं येन तस्मै श्रीगुरवे नमः ॥
गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः ।
गुरुः साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः ॥
श्री पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी की गुरु परंपरा
गुरु परंपरा भारतीय सनातन संस्कृति की आत्मा है। श्री पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी में गुरु को ब्रह्मा, विष्णु एवं महेश के स्वरूप के रूप में पूज्य माना जाता है। गुरु ही शिष्य को आत्मज्ञान, वैराग्य, तप, योग तथा धर्म के मार्ग पर अग्रसर करते हैं। यह अखंड परंपरा सदियों से गुरु से शिष्य तक निरंतर प्रवाहित होती आ रही है और आज भी उसी श्रद्धा, अनुशासन एवं समर्पण के साथ जीवित है।
आध्यात्मिक ज्ञान
गुरु शिष्य को वेद, उपनिषद, शास्त्र एवं आत्मज्ञान का प्रकाश प्रदान करते हैं।
संन्यास दीक्षा
गुरु के मार्गदर्शन में संन्यास की दीक्षा प्राप्त कर साधक धर्म एवं साधना का जीवन प्रारंभ करता है।
अनुशासन एवं साधना
गुरु परंपरा तप, संयम, सेवा और आत्मानुशासन का सर्वोच्च आदर्श प्रस्तुत करती है।
4.9/5
Based on 2500+ reviews
Answers to the question you might have about
1) श्री पंच निरंजनी अखाड़ा
2) श्री पंच आनंद अखाड़ा
3) श्री पंच आवाहन अखाड़ा
4) श्री पंच अटल अखाड़ा
5) श्री पंच निर्वाणी अखाड़ा
6) श्री पंच अग्नि अखाड़ा
7) श्री पंच जूना अखाड़ा.
श्री पंचायती निरंजनी अखाड़े के अंतर्गत 18 मढ़ियाँ हैं।
1) अहं ब्रह्मास्मि
2) अयमात्मा ब्रह्म
3) तत्त्वमसि
4) प्रज्ञानं ब्रह्म
कुंभ पर्व चार स्थानों पर आयोजित
होता है—
1) हरिद्वार
2) प्रयाग
3) उज्जैन
4) नासिक
परमहंस परिव्राजकाचार्य श्रीमद् ब्रह्मनिष्ठ पूज्यपाद श्री निरंजन पीठाधीश्वर श्री श्री 1008 आचार्य महामण्डलेश्वर स्वामी श्री कैलाशानन्द गिरि जी महाराज।
